"Ideas are nobody's property; they belong to whoever expresses them best."  ~ Emilio Cecchi

Thursday, 22 June 2023

स्रोत


हम सभी कामना करते हैं कि हमारे परिवारजन, मित्र और परिचित अपने अपने जीवन में सुखी रहें। हम सभी, अपनी बातों और व्यवहार से प्रयत्न भी यही करते हैं की हम किसी को दुःख ना पहुँचाएँ। हम सभी अपना जीवन धर्म निभाते हैं — उसके अंजाम स्वरूप हम दूसरों के जीवन में कुछ पल सुख के जाने अनजाने में बिखेरते रहते हैं।

व्यक्तित्व और चरित्र के धनी इसकी अनुभूति तुरंत कर लेते हैं और अपनी कृतज्ञता को दर्शाने में कोई कमी नहीं रखते हैं। कुछ शब्द अथवा व्यवहार कुशलता के मितव्ययी प्राणी, समझ कर भी इस भाव को व्यक्त नहीं कर पाते! और कुछ सम्बंध ऐसे बन जाते हैं जहाँ इस प्रकार के प्रदर्शन की गुंजाइश ही नहीं होती!

अब प्रश्न यह उठता है कि ख़ुशी का स्रोत क्या है?
या यूँ कहें कि ज़िंदगी का उद्देश्य क्या है?

ये कुछ विचार ग़ौर करने योग्य हैं! लगते काफ़ी समान हैं पर इनमें सूक्ष्म भिन्नता है ——

पहला — दूसरों की ख़ुशी की कामना करना। दूसरों की ख़ुशी से स्वयं को ख़ुश पाना!

दूसरा — कार्य इस हेतु करना कि अन्य को ख़ुशी मिले।

तीसरा — अपना कर्म करना, धर्म निभाना।

मेरी समझ में, मात्र इस आख़री हरकत पर हमारा वश है। दूसरों को ख़ुशी देना हमारे कार्य क्षेत्र के सीमित दायरे में समा नहीं सकता। शायद मानव का अहंकार होता है जो इस सोच को पनपने की ऊर्जा देता है।

ख़ैर…

ये एक विडम्बना है — ख़ुशी — अपनी तो कर्म पूर्ति के संतोष मात्र से भी प्राप्त हो जाती है। पर की, हमारे वश से परे है। हर निज को अपना स्रोत तलाशना ही होगा!

तो फिर, क्या है आपके जीवन का उद्देश्य? 

स्वयं प्रासन्न रहना? 
अथवा अन्य लोगों की ख़ुशी की मृग-मरीचिका को छूना?

Tuesday, 20 June 2023

Knowing Eye


 

The Fulcrum of Fifteen


Snuggling neatly amidst ten and twenty
Fifteen, the age of exceptional opportunity.
Be a kid for all you want
Flaunt maturity when the hour demands. 


Playing pranks, giggling for no rhyme
Folded over a book, hoping to warp time.
Dodging the bedtime with gay abandon
Still open to ideas; you are fresh, new born.


Passing off as adult to the untrained gaze
Testing freedom’s elasticity, tasting emotions ablaze.
Expanding boundaries uncover marvels untold,
Decisions made, accountability shouldered.


Clawing tightly into the ebbing childhood
Anticipation, curiosity, exhilaration heralding adulthood.
Fearless, unstoppable; rationality not your agency
Unconditioned, unshackled, raw and ready.


Inspired by my daughter’s idea, as she turned fifteen, that she is equidistant from ten and twenty.

Thursday, 8 June 2023

तपिश



चटक इन्द्रधनुषी रंग लपेटे 
नाना प्रकार, विस्मयीं आकार समेटे ।
सींचाई करते दुलार, नमीं, पोषण, धूप
ऋतु आगमन उपरांत ही खिलते हैं पुष्प ॥



कुछ सूर्य का मुख चूम चूम 

कई रात्रि की शीतलता में झूम झूम ।

अवधि कुसुमित रहने की विविध

असीम आभा! कहाँ उस पर आश्रित ॥



खिलने को प्रयत्नशील हर कलि इठलाये

तुलना की तपिश में नज़ाकत कुमल्हा ना जाये ।

हर ख़ुशबू रूहानी, चिर परिचित

प्रोत्साहन की चाह, हृदय में निहित ॥



इक इक फूल करता बगिया को कृत-रचित

झिलमिलाती संगीत संध्या हर नृत्य से सुशोभित ।

स्नेह, सराहना सबकी सर आँखों पर लिये 

हम आशीर्वाद के लिए सदैव झोली फैलाये खड़े ॥


~  दिव्या


नमस्ते !

बच्चियों ने पारिवारिक नृत्य संध्या में भाग लिया और उनकी रचना एवं प्रस्तुति की भरपूर प्रसंशा हुई। हमारा मन उनकी इस कोशिश की कामयाबी से पुलकित हुआ जाता था! 


योजना में घर के अन्य छोटे बड़े बच्चों ने भी हिस्सा लिया था। उनकी प्रतिभा, शैली और प्रयत्नों को नकारती सी प्रतीत हुई वाहवाही एवं टिप्पणियाँ — जब चर्चा सिर्फ़ दो बच्चों की दुहरायी जा रही थी और उन्हें अव्वल दर्जा प्रदान किया जा रहा था।


उस चिंतन से उपजी है यह कविता। उम्मीद रखती हूँ कि यह मेरे भाव व्यक्त कर पायी !


पढ़ने के लिए धन्यवाद। 

आप अपने विचार कॉमेंट्स सेक्शन में लिख कर मुझ तक पहुँचा सकते हैं।